अन्वेषण’ कार्यक्रम: विद्यार्थियों की सोच को मिली उड़ान, दिखी अद्भुत प्रतिभा

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स्थान: हल्द्वानी

हल्दुचौड़।
चिल्ड्रंस एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित अन्वेषण’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, वैज्ञानिक सोच और नवाचार क्षमता का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस विशेष आयोजन ने न केवल बच्चों की प्रतिभा को मंच प्रदान किया, बल्कि उनके बौद्धिक, सामाजिक और व्यावहारिक विकास को भी नई दिशा दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की सह-निदेशिका प्रियांशी पाठक के प्रेरक संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के सतत एवं समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी प्रयोग पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समाजोपयोगी सोच पर आधारित थे, जो उनके जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विद्यालय की प्रधानाचार्या मोनिका जोशी तथा प्रशासिका रेनू मिश्रा ने बताया कि ऐसी गतिविधियाँ बच्चों के बौद्धिक एवं चहुँमुखी विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थियों के आपसी समन्वय और सहयोग से ही इस प्रकार के सफल आयोजनों को संभव बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों ने विद्यालय परिसर में आयोजित विभिन्न प्रदर्शनों और मॉडलों का निरीक्षण किया तथा बच्चों की मेहनत, लगन और रचनात्मकता की खुलकर सराहना की।
विद्यार्थियों ने रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान और रोबोटिक्स जैसे विषयों पर आधारित विविध प्रयोगों एवं मॉडलों का प्रदर्शन किया। पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत, जल शुद्धिकरण, जैव विविधता संरक्षण तथा तकनीकी नवाचार से जुड़े प्रोजेक्ट विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
विद्यालय के नन्हे कलाकारों ने पहेलियों और नाट्य अभिनय के माध्यम से दैनिक जीवन में मिलने वाले पोषक तत्वों के महत्व को सरल और मनोरंजक ढंग से समझाया। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए यह भी बताया गया कि प्राचीन काल से पानी में तांबे का सिक्का डालने की परंपरा क्यों प्रचलित थी—क्योंकि तांबा जल को शुद्ध करने में सहायक माना जाता था। इस प्रकार कार्यक्रम ने परंपरा और आधुनिकता के समन्वय का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया।
इसके अतिरिक्त ‘हाट बाजार उद्यम 2026’ के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा हस्तनिर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनी एवं विक्रय भी किया गया। बच्चों द्वारा तैयार की गई कलात्मक एवं उपयोगी वस्तुओं को अभिभावकों और आगंतुकों ने सराहा। इन वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त धनराशि को सामाजिक एवं जनकल्याणकारी कार्यों में योगदान स्वरूप देने का निर्णय लिया गया, जिससे बच्चों में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित हो सके।
समग्र रूप से ‘अनु से अन्वेषण’ कार्यक्रम ज्ञान, नवाचार, संस्कार और सामाजिक संवेदनशीलता का सशक्त मंच बनकर उभरा। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि बच्चों को सही दिशा और अवसर प्रदान किए जाएँ, तो वे अपनी प्रतिभा से समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

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