शीर्षक: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर नाबार्ड ने किया बुनकरों और कारीगरों का सम्मान, 60 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा


उपशीर्षक: भवाली में आयोजित जागरूकता एवं संवाद कार्यशाला में योजनाओं, ऋण सुविधा और बाजार उपलब्धता पर हुई चर्चा
भवाली/नैनीताल, 12 अगस्त 2026। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), नैनीताल की ओर से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर भवाली स्थित देवभूमि होमस्टे में एक दिवसीय जागरूकता एवं संवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भीमताल विकासखंड के करीब 60 बुनकरों, कारीगरों और अन्य हितधारकों ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्थानीय बुनकरों एवं कारीगरों को प्रोत्साहित करना, उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार की संभावनाओं पर चर्चा करना तथा विभिन्न सरकारी विभागों और बैंकों द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना रहा।
कार्यक्रम में नाबार्ड नैनीताल के जिला विकास प्रबंधक मुकेश बेलवाल, अग्रणी जिला प्रबंधक नैनीताल अमित बाजपेयी, जन शिक्षण संस्थान के प्रतिनिधि गोपाल, जिला उद्योग केंद्र के प्रतिनिधि, विभिन्न बैंकों एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि, आरसेटी के निदेशक गितेश त्रिपाठी सहित वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे।
बुनकरों को योजनाओं और वित्तीय सुविधाओं की दी जानकारी
कार्यशाला में हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विभागीय एवं बैंक प्रतिनिधियों ने बुनकरों और कारीगरों को प्रशिक्षण, स्वरोजगार, ऋण एवं वित्तीय सहायता, उद्यम विकास तथा उत्पादों के विपणन से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी।
बैंक प्रतिनिधियों ने कारीगरों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने और अपनी जरूरत के अनुसार ऋण सुविधाओं का लाभ उठाकर उद्यम को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।
हथकरघा कला उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान: मुकेश बेलवाल
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक मुकेश बेलवाल ने कहा कि उत्तराखंड की पारंपरिक हथकरघा एवं हस्तशिल्प कला केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि बुनकरों और कारीगरों के कौशल को प्रशिक्षण, वित्तीय समावेशन, बेहतर पैकेजिंग, उत्पादों में विविधता, बाजार संपर्क और संस्थागत सहयोग के माध्यम से और मजबूत करने की आवश्यकता है। नाबार्ड ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन, कौशल विकास, स्वयं सहायता समूहों और उत्पादक संगठनों के माध्यम से स्थानीय कारीगरों एवं ग्रामीण उद्यमियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।
कारीगरों ने अधिकारियों के सामने रखीं अपनी समस्याएं
कार्यक्रम में कारीगरों के साथ सीधा संवाद भी किया गया। प्रतिभागियों ने उत्पादन, कच्चे माल की उपलब्धता, वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, बाजार संपर्क और उत्पादों की बिक्री से जुड़ी व्यावहारिक समस्याएं अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों के सामने रखीं।
इन समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए उपलब्ध संस्थागत व्यवस्थाओं के माध्यम से समाधान की संभावनाओं पर विचार किया गया।
लगभग 10 बुनकरों और कारीगरों को किया सम्मानित
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर स्थानीय कला, कौशल और परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान देने वाले लगभग 10 बुनकरों एवं कारीगरों को नाबार्ड की ओर से सम्मानित किया गया। सम्मानित कारीगरों ने इसे अपने कार्य के प्रति प्रोत्साहन बताते हुए स्थानीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
बाजार से जोड़कर आय बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम में बुनकरों, कारीगरों, बैंकों, सरकारी विभागों और विकास संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। स्थानीय उत्पादों की पहचान मजबूत करने, कारीगरों की आय बढ़ाने और पारंपरिक कौशल को टिकाऊ ग्रामीण आजीविका से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई गई।
कार्यक्रम का समापन स्थानीय बुनकरों एवं कारीगरों के कौशल, परंपरा और योगदान को सम्मान देते हुए हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर सहयोग और समन्वय के संकल्प के साथ हुआ।

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