सड़कों पर बेसहारा गौवंश, सत्ता मौन क्यों?हल्दूचौड़ से उठी ‘राष्ट्र माता’ की पुकार

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हल्दूचौड़। देवभूमि में आस्था की प्रतीक गौ माता की बदहाल स्थिति को लेकर हल्दूचौड़ में एक निजी रेस्टोरेंट में गौ सेवक विनोद चंद्र भट्ट ने प्रेस वार्ता कर बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने गौ माता को “राष्ट्र माता” का संवैधानिक दर्जा देने और उत्तराखंड में “राज्य माता” घोषित कर सशक्त कानून बनाने की मांग दोहराई।
🔴 मुख्य हेडलाइंस
गौ माता को “राष्ट्र माता” का दर्जा देने की मांग तेज
सड़कों पर भटकते गौवंश पर सरकार से ठोस नीति की मांग
हरिद्वार से देहरादून तक दंडवत यात्रा और आमरण अनशन का हवाला
36 विधायकों का समर्थन पत्र मुख्यमंत्री को भेजा गया
आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्ताव लाने की मांग
📌 प्रेस वार्ता के मुख्य बिंदु
1️⃣ संवेदनहीनता पर सवाल
भट्ट ने कहा कि सड़कों पर दुर्घटनाओं का शिकार होती गायें व्यवस्था की विफलता का प्रतीक हैं। केवल नारे नहीं, बल्कि कठोर कानूनी संरक्षण की आवश्यकता है।
2️⃣ संवैधानिक दर्जे की मांग
केंद्र सरकार से गौ माता को “राष्ट्र माता” घोषित करने की मांग
उत्तराखंड सरकार से “राज्य माता” का दर्जा देने की अपील
3️⃣ तप और त्याग का उल्लेख
भट्ट ने बताया कि वे हरिद्वार से देहरादून तक दंडवत यात्रा कर चुके हैं और देहरादून में आमरण अनशन कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
4️⃣ राजनीतिक नहीं, सांस्कृतिक विषय
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी दल विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म और सांस्कृतिक स्वाभिमान से जुड़ा विषय है।
5️⃣ विधायकों का समर्थन
उत्तराखंड के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा सहित 36 विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री को समर्थन पत्र भेजे जाने की जानकारी दी गई।
6️⃣ संत समाज और सामाजिक समर्थन
प्रेस वार्ता में भुवन भट्ट, भुवन सिंह बिष्ट, कैलाश पड़लिया, मनीष तिवारी, हेम दुमका और हर्षित बिष्ट सहित कई गौसेवक उपस्थित रहे।
7️⃣ युवाओं से आह्वान
भट्ट ने युवाओं से गौ सेवा को पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए आगे आने की अपील की।
❓ बड़ा सवाल
हल्दूचौड़ की इस पहल ने एक बार फिर सरकार के सामने प्रश्न खड़ा कर दिया है —
क्या गौ माता को केवल मंचों पर सम्मान मिलेगा या उन्हें ठोस कानूनी संरक्षण भी मिलेगा?

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