


प्राइड हॉस्पिटल पर कैश वसूली के गंभीर आरोप, शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप
हल्द्वानी। आयुष्मान भारत–अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत मरीजों को कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था के बीच हल्द्वानी के मुखानी क्षेत्र स्थित द प्राइड हॉस्पिटल को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। अस्पताल और वहां कार्यरत कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ शर्मा पर आरोप है कि गंभीर हार्ट अटैक से पीड़ित मरीज के परिजनों से आयुष्मान योजना के बावजूद उपचार के नाम पर नकद राशि की मांग की गई।
मामले की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट पीयूष जोशी द्वारा जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल से की गई। शिकायत के साथ कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग, बिल और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है।
❤️ हार्ट अटैक के बाद अस्पताल में कराया गया भर्ती
शिकायत और तीमारदार हिमांशु कुनियाल के बयानों के अनुसार, 13 अगस्त को उनके रिश्तेदार विनोद चन्द्र जोशी को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। परिजन उन्हें डॉ. सौरभ शर्मा के निजी क्लिनिक ले गए। जांच के बाद मरीज की स्थिति गंभीर बताते हुए तत्काल स्टेंट डालने की जरूरत बताई गई।
परिजनों के अनुसार उपचार का खर्च करीब ₹1.5 लाख बताया गया। आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने का अनुरोध करने पर स्टेंट की प्रक्रिया आयुष्मान योजना के तहत करने की बात कही गई, लेकिन एंजियोग्राफी के लिए ₹15 हजार नकद मांगे जाने का आरोप है।
इसके बाद मरीज को द प्राइड हॉस्पिटल ले जाया गया।
दो घंटे में ₹35 हजार लेने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद विभिन्न जांचों और दवाओं के नाम पर करीब ₹35 हजार नकद लिए गए। परिजनों का यह भी दावा है कि कुछ जांचों के पक्के बिल उपलब्ध नहीं कराए गए।
आरोप है कि एंजियोग्राफी पूरी होने के बाद जब स्टेंट डालने की बारी आई तो अस्पताल प्रबंधन की ओर से आयुष्मान योजना के तहत आगे उपचार करने से इनकार कर दिया गया और करीब ₹1.5 लाख नकद जमा करने को कहा गया।
दूसरे अस्पताल में कराया गया कैशलेस इलाज
परिजनों ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राइड हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कराया। शिकायतकर्ता पीयूष जोशी के हस्तक्षेप के बाद मरीज को साईं अस्पताल ले जाया गया, जहां आयुष्मान कार्ड के माध्यम से कैशलेस उपचार शुरू किया गया। शिकायत के अनुसार मरीज की सफल कार्डियक सर्जरी हुई और अब उसकी स्थिति स्वस्थ बताई जा रही है।
अब तीन सदस्यीय समिति करेगी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल ने आदेश पत्रांक सी-2/2026-27/4991 के तहत त्रि-सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है।
समिति में:
डॉ. रजत भट्ट — वरिष्ठ चिकित्साधिकारी, संयुक्त निदेशक ग्रेड — अध्यक्ष
डॉ. विनीता निखुर्पा — फिजीशियन, बेस चिकित्सालय हल्द्वानी — सदस्य
डॉ. रेनू सूठा — वरिष्ठ चिकित्साधिकारी, सीएमओ कार्यालय — सदस्य
जांच समिति को अस्पताल के 13 अगस्त के भर्ती रजिस्टर, कैश रसीदें, सीसीटीवी फुटेज और आयुष्मान टीएमएस पोर्टल का रिकॉर्ड सुरक्षित कर मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
⚠️ जांच के बाद तय होगी कार्रवाई
शिकायतकर्ता ने प्रशासन और राज्य स्वास्थ्य एजेंसी से कथित रूप से वसूली गई धनराशि ब्याज सहित वापस कराने की मांग की है। साथ ही दोष सिद्ध होने की स्थिति में अस्पताल का आयुष्मान पैनल निरस्त करने और संबंधित चिकित्सक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
अब पूरे मामले में जांच समिति की रिपोर्ट पर नजर है। जांच के निष्कर्ष के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोप कितने सही हैं और अस्पताल अथवा संबंधित चिकित्सक की जिम्मेदारी किस स्तर तक बनती है।

