
कड़ी सुरक्षा के बीच 79 प्रत्याशियों ने दाखिल किए पर्चे, सचिव पद पर दो उम्मीदवार मैदान में;आरक्षण को लेकर प्राचार्य से हुई तीखी बहस
हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव के नामांकन के दौरान बृहस्पतिवार को दिनभर गहमागहमी का माहौल रहा। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विभिन्न पदों के लिए कुल 79 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए। अध्यक्ष पद के लिए तीन और सचिव पद के लिए दो प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी पेश की। नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी के बाद ही चुनावी तस्वीर साफ हो सकेगी।
अध्यक्ष पद पर तीन प्रत्याशियों के बीच मुकाबला
अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी से धीरज बिष्ट, एनएसयूआई से मेहुल साह और एबीवीपी के बागी प्रत्याशी आर्यन बेलवाल ने नामांकन दाखिल किया। वहीं, सचिव पद के लिए सार्थक रस्तोगी और भविष्य रावत ने पर्चा भरा।
उपाध्यक्ष पद के लिए पूरन सिंह मेवाड़ी, वशिष्ठ कुमार, योगेश चंद्र और योगेश बृजवासी ने नामांकन किया। छात्रा उपाध्यक्ष पद पर दीपा रैकुनी और श्रैया पांडे ने दावेदारी पेश की।
विभिन्न पदों पर प्रत्याशियों ने ठोकी ताल
संयुक्त सचिव पद के लिए रिषिका सिंह ने नामांकन किया, जबकि कोषाध्यक्ष पद पर अक्षिता आर्या, दीपा बिनवाल और आलिमा मैदान में हैं। सांस्कृतिक सचिव पद के लिए चंद्रकांत और अब्दुल अहद सिद्दीकी ने पर्चा भरा।
विश्वविद्यालय प्रतिनिधि पद के लिए करन सिंह डोबाल, यतिन पांडे और गीता ने नामांकन किया। कला संकाय प्रतिनिधि पद के लिए 33, विज्ञान संकाय में 12 और वाणिज्य संकाय में 14 नामांकन दाखिल किए गए।
आरक्षण को लेकर प्राचार्य से उलझे छात्र
नामांकन प्रक्रिया के दौरान आरक्षण के मुद्दे पर कुछ छात्रों की प्राचार्य प्रो. एनएस बनकोटी से बहस हो गई। छात्रों का कहना था कि न्यायालय ने छात्रसंघ चुनाव में आरक्षण पर रोक लगाई है, इसलिए उन्हें भी नामांकन का अवसर दिया जाए।
इस पर प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि न्यायालय और विश्वविद्यालय से लिखित आदेश प्राप्त होने तक पूर्व निर्धारित व्यवस्था के तहत ही नामांकन प्रक्रिया जारी रहेगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, दोपहर तीन बजे बंद हुआ कॉलेज का गेट
नामांकन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए कॉलेज परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर कॉलेज का केवल एक गेट खोला गया था, जिसे दोपहर तीन बजे बंद कर दिया गया।
प्राचार्य प्रो. एनएस बनकोटी और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य दिनभर नामांकन काउंटरों का जायजा लेते रहे। अब नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी के बाद छात्रसंघ चुनाव की तस्वीर स्पष्ट होगी।

